Sunday, 20 October 2019

गुड़िया

ऐसी थी बचपन की यादों की पुड़िया
ना थी फिक्र खाने की
ना ही नहाने की
ना था पास कुछ भी
ना कुछ भी खो जाने की
वो रातों में रोना और ना फुसलना
किस्से सुनाती दादी वो बुडिया
वो छोटे से बच्चों की नन्ही सी गुड़िया
बहुत याद आती है प्यारी सी गुड़िया।
Bskr twry

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